स्वामी स्वरूपानंद को हर हर मोदी से आपत्ति है। उनका कहना है ब्यक्ति पूजा नहीं होनी चाहिए ,ये गलत है। लेकिन जब कोंग्रस ने सोनिया गांधी कि सरस्वती मूर्ति बनाकर मंदिर बना दिया और कांग्रेशी उस का पूजा करते है ,तब ये क्यों नहीं बोलते। जब हिन्दुओ को अकबरुदीन ,जाकिर नईक गली देते है जब आजम खान भारत माता को डायन बोलता है कुछ नहीं बोलते ,कभी गो हत्या या हिंदुत्व् कि बात नहीं करते। सिर्फ गेरुआ बस्त्र पहन लेने से कोई साधू संत नहीं बन जाता है।
Astrology is a devine sceince life is going dey by dey you do not know what happend in future but one astrologer can tell u about your future date wise for your life time prediction . so ? if you aware about your future then life will became very esey.. i am an Astrologer i can give you astrological lpre diction to see your horoscope online if u intrested you can ask me one question online. thrugh email . stroguruji@gmail.com.free online astrology.
सोमवार, 24 मार्च 2014
स्वरुपआनंद जो अपने आपको संकराचार्ज मानता है। हिन्दुओ का गुरु ,क्या कभी हिन्दुओ के बारे में कुछ बोला है। गो हत्या या हिंदुत्व् ,या कश्मीर में मारे गए हिन्दू पंडित। कभी भी ये हिंदुत्व् का बात नहीं करता। असल में ये ढोंगी ,पाखंडी कॉंग्रेस का दलाल है। नरेन्द्र मोदी का नाम सुनते ही ये इतना भरक गया कि एक पत्रकार को थापर मार दिया। संत क्या ऐशे होते है ,आप खुद बिचार करो। हर हर मोदी का नारा से इस पाखंडी को एतराज है ,हर हर का मतलब होता है दुःख हरने बाले , जनता भी अपने नेता से यही ऊमीद करता है कि हमारे नेता हमारा दुःख हरण करेंगे ,इसी लिए जनता मोदी से बहुत उमीद से ये नारा लगाती है हर हर मोदी घर घर मोदी। ईश में पार्टी या नरेंद्र मोदी का क्या दोष। जनता के आबाज को कोई दबा
नहीं सकता।
नहीं सकता।
शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2014
आँचल में दाग ।। भारत माता की कुण्डली . #Bharat_Mata _ki #kundali . By #pandit_pankaj_mishra #Astrologer_kolkata .
आँचल में दाग। भारत माता कि कुंडली। ऊतरै यत् समुद्रस्य ,हिमाद्रस्चैब दछिनाम। बर्ष तद हि भारतम नाम भारतीय यत्र सन्तति । हिन्द महासागर के उतर में तथा हिमालय के दछिन में स्थित महँ देश भारत बर्ष के नाम से जाना जाता है। प्रत्येक भारतीय को यह देश प्राणो से प्यारा है ,तभी तो सच्चा भरतीय गता है , कण कण में सोया सहिद पत्थर पथर इतिहास है ,, इस भूमि पर पग पग में उत्सर्ग और सौर्य का इतिहास अंकित है। श्री गुरूजी गोवलकर इनकी साछात जगत जननी के रूप में उपाशना करते थे। स्वामी बिबेकानन्द ने इनका जगत माता के रूप में साछात्कार किया। यह भारत माता हमारी अराध्या है। इसके सवरूप का बर्णन बणी व लेखनी द्वारा असम्भब है ,फिर भी माता के पुत्र के नाते इसके दिव्य सवरूप का संछिप्त वर्णन करने का दूसाहसः कर रहा हु। इसको बिदेशी बिधर्मी बर्बर आक्रंताओ ने ईश देश को लुटा -खसोटा और नोचा ,परन्तु फिर भी यह राष्ट्र एक अटूट इकाई के रूप में खरा रहा ,यह अमर है तो अपने धर्म संस्कृत के कारन। १५। ८। १९४७ को भारत स्वत्रंत्र हुआ। उज्जैन के प्रख्यात ज्योतिषी स्व व्यास जी के परामर्श से रत १२ ,०५ का समय निश्चित किया गया , स्वत्रन्त्रता पुष्य नछत्र में ली गयी , जिसे एक शुभ नछत्र माना जाता है , बृष लग्न में उच्च का राहु ,दुतीय में मंगल ,तृतीय सूर्य, चन्द्र ,बुध , शुक्र ,शनि एवं छठे भाव में गुरु स्थित है। जहा शुक्र के साथ पाच ग्रह कि युति है। अतः बर्ष १९८९ से शुक्र का महादशा जबसे आरम्भ हुआ साझा सरकारो का दौरा सुरु हुआ। भारत का बृष लग्न होने से लग्न का स्वामी शुक्र स्त्री करक ग्रह है ,यही कारन है कि इस देश के सत्ता के बागडोर महिला के हाथो में रहा है। दिनांक २६। ०१। १९५० को दिनमे १०। १० पर भारत गणतंत्र बना। दुर्भाग्य से देश कि स्वतंत्रता एवं गणतंत्रता कुंडली में राहु कि स्थिति लग्न में है ,जो चोरी अनाचार भ्रष्टाचार आतंकबाद एवं दुराचार अलगाववादी करक ग्रह है। भारत के कुंडली में अभी सूर्य कि महादशा चल रही है जो २१,०६,२००९ से २१,०६, २०१५ तक चलेगी ,भारत के कुंडली में सूर्य चौथा भाव का स्वामी है ,चौथा भाव जनता का है ,जनता सरकार के नितयो के बिरुद्ध बगावत कर देगी ,जनता में सरकार के खिलाफ आक्रोश बढ़ेगा। १३,०२,२०१४ से २१,०६,२०१४ तक सूर्य में केतु कि अंतर्दशा आते ही सरकार के ऊपर बहुत बरे बड़े संकट आएगे ,सरकार चलाना बहत कठिन होगा ,गिर भी सकती है सरकार क्योंकि सहयोगी दल सरकार से अलग होने में ही अपना भलाई समझेगे ,एवं बिपछि पार्टीओ का शिकंजा और कसेगा। आतंकी घटना और प्राकृतिक आपदा से जानमाल का भारी नुकसान होगा और सत्ता परिवर्तन होगा। लग्न में राहु एवं सप्तम में केतु होने के कारण यह देश टुकड़ो टुकड़ो में बट गया ,आगे भी का और भी कई टुकड़े हो जायेगे। हमारे नेता वोट बैंक के लिए देश को टुकड़े टुकड़े कर देंगे।
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बुधवार, 5 फ़रवरी 2014
क्या भारतीय जनता पार्टी कि सरकार बन सकेगी ?
क्या भारतीय जनता पार्टी कि सरकार बन सकेगी ?
लोक सभा चुनाब सामने आ गया है ,सभी का उत्सुकता इस बात में है कि किसकी सरकार बनेगी। बीजेपी का बनबास खत्म होगा या कोंग्रेस फिर बजी मारलेगी। दिली में जिस तरह से बीजेपी कि कुर्सी केजरी&कोंग्रेस ने सरकार बनने से पहले खीच ली ,क्या यही हल लोकसभा चुनाब २०१४ में ,ठीक सर्कार बनने से पहले न हो , कहते है दूध का जला छाछ भी पुक कर पीना। बीजेपी देल्ही बिधान सभा चुनाब से सबक लेगी। क्योकि २०१४ लोकसभा चुनाब में , दिल्ली चुनाब बाला ही समीकरण सामने आयेगा। बीजेपी सबसे बरी पार्टी बनकर सामने आयगी। कोंग्रेस पिछड़ जायगी। लेकिन छेत्रियदल का भूमिका सरकार गठन में महत्व्पूर्ण होगा। तीसरे मोर्चे में , MMM ममता मुलायम मायाबती का सरकार गठन में महत्व्पूर्ण भूमिका होगा। सत्ता कि चाभी ममता बनर्जी के हाथ में होगी। । ज्योतिष सास्त्र के हिसाब से देखे तो ,भारतीय जनता पार्टी का उदय ६. ४. १९८० को दोपहर ११. ४५ बजे , मुलसंज्ञक ज्येष्ठा नछत्र ,अभिजीत मुहूर्त ,मिथुन लग्न में हुआ भाजपा कि मिथुन लग्न कि कुंडली में ,लग्न से तीसरे पराक्रम भाव में मंगल, बृहस्पति, शनी एवं राहु , छठे शत्रु भाव में चद्रमा ,नवम भाग्य भाव में बुध और केतु ,दशम कर्म भाव में सूर्य तथा बारहवे हानि करक भाव में शुक्र बैठा है। कुंडली में सौ से ज्यादा सुभासुभ योग बने है , इस में सर्भादिक प्रभाब साली एवं आकस्मिक परिणाम देने बाली च्तुर्ग्र्हि योग का पराक्रम भाव में बनना बहुत ही शुभ फलदायक है। कुंडली का सर्बोच्च शुभ योग पराक्रमेश सूर्य का दशम में बैठना और उस पर मंगल कि शुभ द्रिष्टि का होना बहुत सुबह है। अप्रेल २०१२ से अप्रैल २०१८ तक भाजपा कि सूर्य कि चल रही है। सूर्य में राहु कि अंतर्दशा ३-५-२०१३ से २८-३ -२०१४ तक ,बाधक है ,उसके बाद सूर्य महादशा में गुरु कि अंतर्दशा सुरु होगी ,और ,गोचर में सूर्य १४..४. २०१४ से अपनी ऊच्च राशि मेष में आ जायेगी ,सूर्य सत्ता का परम कारक ग्रह है ,सूर्य का दशा एवं गोचर में सूर्य का ऊच्च राशि में आना अतयंत शुभ हो गया ,अंतर्दशा गुरु २८. ३. २०१४ से सुरु हो जायगी जो सत्ता के करीब ले जाएगी थोरा बहुत जो सहयोगी दलो से मतभेद रहेजा वो १९. ०६ २०१४ से जब बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश करेगे तो ,बिरोधी भी भाजपा के सपोर्ट में आ जायगे। सूर्य और बृहस्पति का दशा और गोचर बहुत अनुकूल फल देगे। साथ ही शुक्र २७. ४. २०१४ से कर्म स्थान में उच्च का हो कर प्रवेश करेगा। वाह कितना सुखद संयोग ग्रहो का योग बन रहा है। सत्ता का प्रवल कारक ग्रह सूर्य एलेक्सन के समय बीजेपी कि कुंडली में पराक्रम स्थान का स्वामी होकर लाभ स्थान में उच्च का रहेगा , कर्म स्थान का स्वामी गुरु भी उच्च का रहेगा उतनाही नहीं ,कर्म स्थान में शुक्र भी उच्च का रहेगा। इस बार बीजेपी को सत्ता सुख जरुर मिलेगा ,इसमें संदेह नहीं।
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शनिवार, 25 जनवरी 2014
सोमवार, 20 जनवरी 2014
रविवार, 4 नवंबर 2012
मित्रो नमस्कार फिल्म निर्माता महेश भट्ट ने मिडिया में कहा की भारतीय जनता सेक्स का भूखा है महेश भट्ट की जितनी भी फिल्मे है उसमे सेक्स के सिबा कुछ नहीं होता है भारत म गन्दगी फ़ैलाने में ये सबसे आगे है ,इसने पोर्न स्टार सनीलियोन को भी भारत में गंदगी फ़ैलाने के लिए बिदेश से भारत बुला लिया / बाप तो बाप इसकी बेटी जो फिल्मो में नहीं चली अब सुनने में आ रहा है की पूजा भट्ट समलैंगिको ( गे ) पर फिल्मे बनाये गी / 90% भारतीय जनता समलैंगिक क्या होता है नहीं जानते ,पूजा भट्ट फिल्मो के द्वारा लोगो को बतायेगी ,आवर हमारे समाज को दूषीत करेगी सरकर इसे सेंसर बोर्ड में पास कर देगी फिर हमारे समाज में इसका क्या असर होगा इसका आप खुद अंदाजा लगा ले ,कांग्रेस सरकार पहले ही समलैंगिको को अधिकार देने की बात कह चुकी है , महेश भट्ट के फिल्मो का हमें बहिष्कार करना चाहिए / आज प्रकाश झा जैसे निर्माता से महेश भुत्त जसे गंदगी परोसने वाले लोगो को सिखाना चाहिए जो सामाजिक बिषयो पे फिल्म बनाते है ,और समाज निर्माण में अपना सहयोग करते है , असल में कुत्ते को जहा गन्दगी दिखे गा वही मुह मारेगा / यदि समाज को स्वच्छ रखना है तो महेश भट्ट पूजा भट्ट के फिल्मो का बहिष्कार करे ,आपका क्या मत है /
सोमवार, 16 जुलाई 2012
दुकानों के लिए वास्तु निर्देश ।।
प्रायः देखने में आया है की एक ही बाज़ार में एक ही प्रकार के व्यापार करने बाले कई दुकानों में से कुछ दुकाने अछी चलती है , इसके बिपरीत कुछ दुकाने ना के बराबर चलती है , इसका मुख्य कारण दुकानों का वास्तु अनुरूप ना होना भी हो सकता है अतः निचे कुछ महत्वपूर्ण वास्तु निर्देश दिये जा रहे है / जिसका पालन करने से निश्चय ही लाभ होगा , 1* यदि दुकान का स्वामी पूर्ब दिशा की ओर मुह करके बैठता हो तो तिजोरी ( धनकोष ) उसके दायी ओर होनी चाहिये / 2* दुकान मालिक यदि उत्तर की ओर मुह करके बैठता है तो तिजोरी उसके बाई ओर होनी चाहिए / 3* भण्डार के लिए दस्छिन -पश्चिम दीवारों के साथ सामान रखे या स्टोर बनाए / 4* दुकान का उत्तर -पूर्ब भाग दोषपूर्ण हो अर्थात गंदगी , टूट फुट हो तो तो दुकान मालिक को सन्तान पछ से कष्ट रहता है / 5* बिजली के उपकरण , स्विच , बिधुत यंत्र दच्छिन , दछिन -पूर्व कोण में लगाने चाहिए / 6* बिजली से तैयार माल को उतर -पश्चिम कोने में रखना चाहिए / इससे सामान की बिक्री में ब्रिधी होगी / 7* सामान्यतः पूर्व एवं उत्तर मुखी दुकाने शुभ मानी गई है / पश्चिम एवं दच्छिनमुखी दुकाने भोजन एवं मनोरंजन कार्यो के लिए अच्छी मानी गई है / 8* दुकान या छोटे कार्यालय में जल स्थान , पानी का बर्तन एयरकंडीशनर उत्तर पुर्व में होना चाहिए / 9* बड़ी दुकानों में उत्तरपूर्व में शौचालय न बनाए / 10* दुकान के सामने बिजली , टेलीफोन का खम्भा पेड़ आदि होना अशुभ है / 11* तिजोरी अल्माड़ी उत्तर या पुर्व दिशा की ओर खुलनी चाहिए अतः इन्हें दस्छिन या पश्चिम में रखना चाहिए / 12* उत्तर पूर्व दिवार पर दर्पण होना शुभ है / 13* नजर उतारने का टोटका ; दुकान या प्रतिष्ठान को नजर से बचाने के लिए प्रत्येक शनिवार को एक नीबू एवं सात हरी मिर्च दुकान के बाहरी गेट में ऐसी लगानी चाहिए जहा पर सभी की दृष्टि उस पर पड़े परन्तु उससे कोई टकराये ना / 14* अपनी दुकान या प्रतिष्ठान में अपने इष्ट देवता की स्थापना करनी चाहिए / 15* दुकान या प्रतिष्टान में अपने प्रेरक का चित्र / फोटो अबश्य लगाना चाहिए / #पंडित_पंकज_मिश्र #ज्योतिष_कोलकाता।।
शनिवार, 14 जुलाई 2012
गृह सज्जा बास्तु के आईने में
वास्तु अनुरूप भवन निर्माण के साथ ही वास्तु अनुरूप गृह सज्जा भी हो तो भवन स्वामी एवम वहा के निवाशियों के लिये अधिक शुभ फलदायक हो जाता है / गृह सज्जा के प्रमुख सूत्र - 1*. दीवारों का रंग ऐसा होना चाहिए जो ज्योतिष दृष्टि से अनुकूल हो / 2*. पूजा गृह हमेशा ईशान कोण में बनाये / 3*.रशोई अग्नि कोण में होनी चाहिए / 4*. सयन कच्छ दछिन -पश्चिम में बनाये , बैठक उत्तर - पूर्ब या या उत्तर पश्चिम में ही बनाए / 5*. बच्चो का कमरा उत्तर -पूर्व या दछिन -पूर्व में बनाये / 6*. अन्डरग्रौन्ड पानी का टेंक उत्तर - पूर्ब या उत्तर में ही बनाये / 7*. ओवरहेड पानी की टंकी दछिन पश्चिम में ही रखे / 8*. सीढ़ी घडी की सुइयो की दिशा में बनानी चाहिए / 9*. उत्तर - पूर्व में खली जगह अधिक छोड़े / 10* उत्तर व पुरव में भाडी निर्माण न करे / 11* मेन गेट प्लोट के बीचो बिच नहीं होना चाहिए . तथा उत्तर -पूर्व में बनाये / 12* मकान में पानी का ढलान उत्तर या पूर्व में होना चाहिये / 13* कभी भी अग्नि कोण में पुजा या शौचालय न बनाए / 14* कभी भी अन्डरग्रौंड पानी का टैंक अग्नि कोण में न बनाये / 15* शौचालय कभी भी उतर -पूर्व ईशान में न बनाए / 16* वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार दिशा का निर्णय अतिमहत्वपूर्ण है / गृहस्वामी की राशी के अनुसार कर्क . ब्रिस्चिक एवं मीन राशी वालो को मुख्य द्वार की दिशा पूर्व / वृषभ .तुला . कुम्भ राशी वालो को पश्चिम / मेष . सिंह . धनु की ऊतर तथा मिथुन कन्या .मकर राशी वालो गृह स्वामी को मुख्य द्वार की दिशा दछिन रखना शुभ है / मकान का मुख्य द्वार एक ही होना चाहिए / 17* लग्नेश के रंग का प्रयोग दीवारों पर होने से स्वास्थ्य उत्तम रहता है . तथा रोगी व्यक्ति शिघ्र स्वस्थ्य लाभ प्राप्त करता है / 18* परामर्श कार्य . मानसीक क्रिया प्रदान कार्यो के लिए राशी के अनुकूल रंग का प्रयोग दीवारों पर अवं पर्दों के रंग का चुनाव करना चाहिए / 19* भवन में किसी कड़ी या वीम के निचे बैठना एवं सोना अनुकूल नहीं है /20* सोते समय सिरहाना सदैब दच्छीण में तथा पैर उतर में रखे / 21* वास्तु के अनुसार घर में तुलसी रोपण एवं द्वार पर कुमकुम से स्वास्तिक चिन्ह भी आवस्यक है / तुलसी का पौधा कृमिनाशक है / यह अपने चारों ओर सौ हाथ तक के वायुमंडल को शुद्ध रखता है /
गुरुवार, 12 जुलाई 2012
ज्योतिष द्वारा मनपसन्द सन्तान कैसे
मनचाही सन्तान लड़का या लड़की उत्पन्न करना हमारे वश की बात है बसर्ते हमें इस विषय पर प्रयाप्त और ठीक ठाक जानकारी हो । शास्त्र सम्मत बिधी बिधान के अनुसार मन पसन्द सन्तान की उत्पत्ती कैसे हो इस पर चर्चा हम यहाँ करेंगे । सभी दम्पति यह चाह्ते है की उनकी सन्तान स्वस्थ , सुन्दर और बुद्धिमान हो , साथ ही साथ दम्पति खुद निर्णय करे की उन्हे पुत्र चाहिए या पुत्री , लेकिन यह वहुत कम दंपत्ति जानते है की ऐसा कैसे हो सकता है । यह जो बिधी हम बताने जा रहे है यह 100 प्रतिशत सफल सिद्ध हुयी है एक दम्पति ने इस बिधी का पालन किया फलस्वरूप ( पांच पुत्रियों के बाद) पुत्र उत्पन्न करने में सफलता पाई । मेरा मकसद लिंग संतुलन बिगारना नहीं है । एक दम्पती जिसे तीन पुत्र था उन्हें एक पुत्री की चाह थी इश बिधी का प्रयोग से पुत्री हुयी । ऐसे अनेक प्रमाण है , यह अनुभब सिद्ध प्रयोग है , । गर्भ धारण संस्कार का उचित समय दो बातो पर निर्भर करता है । आपको लड़का चाहिए या लड़की । पुत्र को जन्म देने की इछा से किये जाने बाले गर्भधारण संस्कार का उचित समय ... एक तो यह की उस समय शुक्ल पछ ( चाँदनी रात वाला ) हो और दुसरी यह है की जिस दिन पत्नी का मासिक धर्म सुरु हुवा हो उस दिन रात को पहली रात मानकर गिनने पर आठमी , दशमी , बरहमी , या चौदहमी रात हो । यह तो हुयी मोटी बात , मुख्य और जरुरी बाते जिसका पालन होना अनिवार्य होता है वह यह की इस गणित के अनुसार आगामि महीनो में ऐसा संयोग कब बनेगा । जब इधर स्त्री का मासिक धर्म शुरू हो और उधर शुक्ल पक्छ की एकंम तिथि (परवा ) एक ही ही दिन पड़ जाये / एक दो दिन आगे पीछे भी शुरू हो तो कार्य सिद्ध होने में कोई बाधा नहीं पड़ती / गणित के इस बिबरण को फर्मुला मान ले और जब भी पत्नी का ऋतुस्राव शुक्ल पछ की तिथियों से संयोग कार्यक्रम निर्धारीत कर ले / अवं अच्छी तैयारी के साथ अनुकूल रात्रियों में गर्भधान संस्कार आयोजित करे / सारे प्रयत्न निष्ठां पुर्बक और सतर्कता के साथ करे और फल भगवान पर छोड दे \ प्रायः संतान न होने के लिए स्त्री ( पत्नी ) को दोषी ठहराया जाता है और बदनाम भी किया जाता है / यदि पुरुष के सुक्र में पर्याप्त शुक्राणु नहीं हो .गर्भ स्थापित न होने का कारण स्त्री नहीं पुरुष होगा / नये बैज्ञानीक अनुसन्धान के आधार पर कहा जा सकता है . की व्यक्ती अपनी इछा से लड़का या लड़की पैदा कर सकता है . इस बात के वैज्ञानीक प्रमाण मिल चुके है . / स्त्री के अंडे ( ovum ) में केवल ( X ) क्रोमोसोम पाये जाते है . जबकि पुरुष में X और Y दोनों क्रोमोशोम्स होते है / यदि X और Y क्रोमोशोम्स का संजोग हो तो लड़का शरीर बनता है / और यदी गर्भधान के समय पुरुष के शुक्र में X क्रोमोशोम्स गैर मौजूद हुवा तो गर्भधान लड़की का हो जायेगा / भारतीय जयोतिष के अनुसार शुक्ल पछ के समय सम संख्या बाली आठवी .दशवी . बारहमी . अदि रात्रियो में गर्भधान करने से पुत्र प्राप्ति का बिधान बताया गया है / इन रात्रियो में चंद्रमा के प्रभाव से शुक्र में X क्रोमोशोम्स की उपस्थीती बनी रहती है / बैज्ञानिको के अनुसंधानानुसार चन्द्रमा के प्रभाब से पुरुषो के शुक्र में X क्रोमोसोम्स प्रयाप्त मात्रा में मौजुद पाई गई एवं बिशम रात्रियों में Y क्रोमोशोम्स की अधिकता थी / स्त्री अपने मासिक अबधी के 12 वे से 14 वे दिन के मध्य अत्यधिक प्रजनन सामर्थ्य रखती है /यदि पुत्र उत्पन्न करने की अभिलाषा हो तो पति व पत्नी को बड़े सयम के साथ गर्भधान के लिए सतर्कता पूर्वक नियम का पालन करते हुवे स्त्री के मासिक धर्म का पहला या दूसरा दिन शुक्ल पछ की पहली व दूसरी तिथि के साथ साथ पड़े तो सर्वाधीक प्रजनन छमता बाले 12 वे एवम 14 वे रात पुरुष के शुक्र में भी Y क्रोमोसोम्स सर्वाधिक सघन मात्रा में उपलब्ध रहते है . जो पुत्र उत्पती के लिए अति आवश्यक और मूल कारक है / जब यह संयोग बने तभी 12 वे 14 वे दिनों में गर्भधान संस्कार होना चाहिये / अन्य दिनों में गर्भधान होने से कन्या सन्तान की सम्भाबना अधिक रहती है / यह ध्यान रखने की बात है की मासिक धर्म का पहला या दुसरा दिन शुक्ल पछ की पहली या दूसरी तिथि हो और 12 वे .. 14 वे दिनों के पहले या बाद में पुरुष ब्रम्हचर्य का पालन करे या गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करे //
बुधवार, 11 जुलाई 2012
रहस्यमय है कुण्डलनी जागरण
रहस्यमय है कुण्डलनी जागरण // जिस प्रकार एक परुमाणु के बिखंडन करने पर उसमे से असीम शक्ति उत्पन्न होती है वैसे ही मानव देह में कुण्डलनी जाग्रत होने पर उसमें दैवी शक्ति का प्रदुर्भाब होता है / शास्त्रों में लिखा है // ; सशैल वन धत्रिनाम यथा धरोहिनायकम सर्वेषां योग तान्त्रनाम तथा धारोही कुंडली //;; जिस प्रकार समस्त पृथ्वी .वन .पर्वत आदि आधार अधिनायक विष्णु है . उसी प्रकार समस्त योग और तंत्र का आधार कुण्डलनी है / ; यत पिण्डे तट ब्रम्हंडे ; पूरा ब्रम्हाण्ड मनुष्य के शरीर में ही विद्ममान है / आवश्यकता है इसे जानने की / हमारे मष्तिष्क में लाखो छोटे छोटे सेल है , पर इनमे से केवल एक दो प्रतिशत सेल ही जागृत है . बाकी सारे सेल या ग्रंथिया सुप्तावस्था में है / इन सेलो में आस्चर्यजनक गुण और प्रभाव है / हमारे पूर्वज ऋषियों में कुण्डलनी जाग्रत था फलतः वे असाधारण कार्य करते थे .जिसे सुनकर विस्वाश नहीं होता की ऐसा भी संभव है ? / डॉकटरो और शरीर बैज्ञानिको ने शरीर के वाह्य अंगो और उससे सम्बंधीत रोगों के वारे में तो थोड़ी वहुत जानकारी प्रात की है परन्तु इससे भी एक बरी दुनिया हमारे शरीर में बिद्यमान है / योगियों के अनुसार समस्त ब्रम्हांड और उसमे होने वाली हलचल हम अपने शरीर में देख सकते है / ... शरीर में मूलतः सात चक्र है जो की अत्यंत महत्वपूर्ण है . और इन चक्रों का भेदन करना ही ब्रम्हाण्ड को समझना है / मूलाधार .स्वधिस्थान . मणिपुर .अनाहत . विसुधि .आज्ञा चक्र एवं सह्स्त्रार . ये सभी चक्र अपने आप में सुप्तावस्था में है / परन्तु विशेष क्रिया द्वारा तथा गुरू के सहयोग से इन चक्रों को जगाने की क्रिया प्रारम्भ की जाती है / कुंडलनी सक्ति का निवास मूलाधार चक्र में है / यह मूलाधार चक्र रीढ़ की हड्डी के सवसे निचले छोर में है / यहा भूलिंग है जो साढ़े तीन कुंडल मारकर सर्प के सामान सोया पड़ा है . उसका मुख नीचे की तरफ है / साधक जब इस शक्ति को जगा देता है . बन्धन कटने लगते है .और उर्ध्व गती आरंभ हो जाती है // जब ये चक्र जागते है तो बिचित्र और विबिध अनुभब प्राप्त होते है . साधक को स्वतः ही काव्यस्फुरण होने लगता है /नवीन कबिताये उसके मुह से उच्चारण होने लगता है .वह विश्व के किसी भी स्थान में सुछम शरीर द्वारा सेकेण्ड में कोई दृश्य देख सकने में समर्थ होता है / वह त्रिकालदर्शी बन जाता है / स्वतः ही वेद मंत्र उच्चारण होने लगता है / हमारे सिर के मध्य भाग में उल्टा छाते की तरह का गुम्बज है जो अधो मुखी है . और उसमे से निरन्तर रस प्रवाहित होता रहता है / इसमें हज़ार से भी ज्यादा छेद होते है / इसलिए इसको सहस्त्रार कहा गया है / जब कुंडलनी इडा और पिंगला नाड़ियो के मध्य से सुषुम्ना को साथ लेकर सहस्त्रार तक पहुचती है .तब सहस्त्रार गुम्बद से टकराती है .टकराने से उनमे से रस झरने लगता है . जो की अमृत रस होता है / यह अमृत रस इन नाड़ियो के माध्यम से पुरे शरीर में फैल जाता है और सारा शरीर स्वस्थ . निरोग . तेजस्वी तथा प्रकाशयूक्त हो जाता है / उसके चेहरे पर एक ऐसा तेज . आभामंडल बन जाता है . जैसा की देवताओ के सिर के चारो ओर दिखाई देता है / साधक को स्वतः ही वाक सिद्दी प्राप्त हो जाती है / वह किसी को श्राप या वरदान दे तो पूर्ण होता है / वह समाज में नेतृत्व प्रदान कर सकता है / एक नई दिशा दृष्टी देकर सैकरो हजारो लोगो का पथ प्रदर्शन करने की छमता प्राप्त कर लेता है / कुण्डलनी जागृत होने पर व्यक्ति के ज्ञान का कितना विस्तार हो जाता है . इसको शव्दों में व्यक्त करना कठीन है //
मंगलवार, 10 जुलाई 2012
TANTRA
तंत्र शास्त्र में पंचमकार // आज तंत्र के छेत्र में दो नाम प्रायः सुनने में आते है // 1.कौल 2.वाम मार्ग सर्व साधारण में यह धारणा फैलाती चली गई की तन्त्र में मांस मदिरा मैथुन आदि पंचमकार के उपयोंग में लिप्त रह्कर जीवन व्यतीत करना ही तंत्र है // आज के परिपेछ्य में कुछ लोग तंत्र बेत्ता होने का ढोंग रच कर सच्चे साहित्य के बिपरीत अर्थ करते दिखाई देते है // क्या वैदिक व पौराणिक काल में नर बलि ,पशु बलि व मदिरा सेवन अवास्य्क था // क्या बाम मार्ग ,तंत्र शास्त्र में पंचमकार (मद्द ,मांस , मत्श्य ,मुद्रा व मैथुन ) क्या वास्तविक थे // आईये आज इस विषय पर कुछ चिन्तन मनन करे // 1.मांस ..एक परिभषिक सव्द है // जब उरद के दाल को दही के साथ मिला दिया जाता है तो उसे रूढी अर्थ में मांस या बली अन्न भी कहते है //पिछिली कई पीढियों से हमारा परिवार ज्योतिष .तंत्र व कर्मकाण्ड में अग्रगण्य रहा है और यह मेरा परम सोभाग्य है की मेरा जन्म उस परिवार में हुवा जगत गुरू शंकराचार्य सारे भारत में सास्त्रथ के लिए भ्रमण करते हुवे मंडन मिश्र के दर पर पहुचे जहा तोता भी संस्कृत में बोलता था //पानी भरने वाली नोकरानी भी संस्कृत में बात करती थी // पिछली नव पीढियों से मंडन मिश्र परिवार ब्राह्मणों के कुलगुरु के रूप में प्रतिष्ठित है // हजारो यज्ञ हमारे परिवार द्वारा सम्पन्न कराये गये है एवं कराये जाते रहेंगे / परन्तु मद्द मांस प्रयोग हमने कभी नहीं देखा /यज्ञ की पूर्णाहुति के समय दिक्पाल्बली होती है / उस समय उरद व मसूर की दाल को दही में मिलाकर पीपल के पत्तो पर घृत दीप से यूक्त करके दशो दिशाओ में रखा जाता है // उसे मांस बली कहते है / पिछले हजारो वर्षो से यही क्रम चलता आ रहा है / साक्त यज्ञ में मधु की आहुति दी जाती है / मधु का अर्थ केवल शहद है .पुष्पों का रस अब यदि कोई मधु का अर्थ मदिरा कर दे / तो यह उसकी बुधि की बलिहरी है // ,,,,,मद्म मांसं च मुद्रा मैथुनेव च मकार पञ्चकं प्रहुयोगिनामुक्तिदाय्कम ,,// इस पन्च्मकारो का रह्श्य बहुत गुढ़ है / वास्तव में यह अभ्यन्तर अनुष्ठान के प्रतीक है / जो कोई उन्हें भौतिक अर्थ में प्रयोग करता है वह यथार्थ से वहुत ही दूर है / *मद्य का अर्थ सराब नहीं ब्राम्हरंध में स्थित जो सहस्त्रार है उसमे जो सुधा छरित होती है उसे ही मद्द कहते है / उसी को पीने वाला वयक्ति मदप कहलाता है यह खेचरी मुद्रा के द्वारा सिद्ध होता है / इसीलिए तंत्रों का कथन है ,,वयोम्पंक्ज निश्य्द सुधापंरातोनर .मधुमाई समः //
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