शुक्रवार, 16 सितंबर 2022

Narendra Modi Horoscope janmkundali. Analysis by pandit pankaj mishra Astrologer kolkata. श्री नरेंद्र मोदी जी की जन्मकुंडली ।

Narendra Modi Horoscope 
 janmkundali. Analysis  by pandit pankaj mishra Astrologer kolkata. 
श्री नरेंद्र मोदी  जी की जन्मकुंडली ।
 
भारत के प्रधानमंत्री  श्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को सुबह 10:15 पर गुजरात राज्य के वड़नगर मेहसाणा में हुआ था । मोदी जी की कुंडली तुला लग्न और वृश्चिक राशि की है जन्म का नक्षत्र अनुराधा है जो कि दूसरे चरण में उनका जन्म हुआ है । 

  
मिडिया मे इनकी कुंडली बृशचिक लग्न की प्रचलित है जो सरासर गलत है, देखने से भी मोदी जी तुला लग्न के जातक दिखते है, जो ऐक अनुभवी ज्योतिष ही जान सकता है, शोशल मिडिया मे ज्यादा तर नकल कॉपी कर ऐक ही चीज को अपने नाम से पोस्ट करते है, अपना दिमाग नही लगाते है । Google  में सर्च करो तो इनकी बृश्चिक लग्न की कुण्डली ज्यादातर दिखता है, जो गलत है किसी ऐक का मेहनत हजारो लोग बिना सोचे समझे अपने नाम से पोस्ट कर  विख्यात होने का गलत कोशिश करते रहे है ।   अब मोदी जी के चाल  चेहरे व्यक्तित्व को देखकर कोई भी अनुभवी ज्योतिष तुला लग्न ही बतायेगा,  तुला मतलब तराजू के तरह बैलेंस बनावट शरिर बैलेंस चाल, ईनके जीवन के घटनाक्रम के साथ मेल खाता है जैसे  बिदेश  मे सफलता  । सांसारिक जिवन । कपडो के शौकीन भाषण कला सबका ताल मेल जीवन के प्रमुख घटनाक्रम दशा अंतर्दशा का गणना काल क्रम से बिल्कुल मेल खाता है । जबकि मिडिया मे प्रचलित इनकी बृशचिक लग्न की कुंडली से ना ही इनका व्यक्तितव ना ही  जिवन के घटनाक्रम से मेल नही खाती है ।  लग्नेश शुक्र ऐकादश भाव मे शनि के साथ गुरु शनि की समसपतक सन्यास योग " यही कारण है कि मोदी सन्यासी जिवन जिने का आदी है  । कर्म स्थान का स्वामी चन्द्रमा दुतिय बलवान मंगल के साथ  क्षेत्राधिपती योग मंगल सेनापति सहायक कृष्ण के तरह सारथी सहयोगी के रूप मे अमित शाह मंगल के भूमिका मे,  चंद्रमा कर्म स्थान का स्वामी स्त्री कारक फलतः मोदी मंत्रीमंडल मे महिला का बड़ा सहयोग । यद्यपि चंद्र निच का होने के कारण जिवन मे मानषिक तनाव यंत्रणा जरूरत से ज्यादा झेलना पड़ा है तरह तरह के सजिस आरोप झेलते हुऐ बहुत मजबूत मानसिकता संसारिक बंधन मे अरूचि 
 । दूरदृष्टि दृढ निश्चय ।
नवम भाव के स्वामी बुध द्वादश मे ऊंच के नवम द्वादश का शुभ योग जातक को बिदेश मे ऊंच सफलता दिलाता है, ये शुभ योग श्री मोदी जी की कुंडली मे दिख रही है । भाग्येश बुध द्वादश भाव मे ऊंच का बुध बाणी का कारक ग्रह है यही कारण है कि मोदी जी की वाणी भाषण मे ऐक    चुंवक के तरह आकर्षित करती है,  बुध के साथ सूर्य का योग बुद्धादित्य योग के कारण बिदेश मे बरे बरे राजनेता मोदी के सामने  सर झुकाते है जनता ऐक झलक देखने के लिए मोदी मोदी के नारे लगाते हुए झुमने लगते है, ये है बुद्धादित्य योग का कमाल । पर सूर्य बुध के साथ देखे तो केतु भी साथ मे बैठा है । केतु का फल =     रहस्यमई सखसियत   
केतु +सुर्य योग ग्रहण योग के कारण बहुत कष्ट झेलनी पड़ी बचपन से ही  गरिवी  अभाव पिता के सुख मे कमी,  मिथ्या आरोप  पर यही केतु  रहस्यमयी सखसियत  का ईनका अगला कदम क्या होगा? कोई नही जानते  दैवो न जानाती कुत्तों मनुषयम । रिस्क लेना जोखिम उठाने की कोशिश बड़ा फैसला लेकर सब को चौंका देना 'बडे बडे शत्रु पैदा कर लेना  दूरदृष्टि कूटनीतिक । छठे स्थान मे राहु  शत्रुहंता योग  , राजनीति का प्रवल कारक ग्रह है राहु । शनि चतुर्थ भाव जनता का प्रतिनिधित्व कारक लग्नेष शुक्र के साथ अच्छा तालमेल सत्ता कारक सूर्य के घर मे बैठे है यही कारण है कि जनता के लोकप्रिय नेता बने  ।  द्वादश केतु दुतिय मंगल शत्रु द्वारा छुप कर अगनेअस्त्र-से हमला होने की प्रवल संभावना है,  कब होगा घटना ईसके लिए दशा अंतर्दशा गोचर का गहन अध्ययन कर किसी भी भावी घटना का समय निकाला जा सकता है। अपने सुरक्षा पर बिशेष ध्यान देने की जरूरत खास करके बिदेश दौरे पर ज्यादा ये केतु बिदेश के संकेत दे रहा है ।। केतु मंगल लग्न के दोनो ओर जानलेवा हमला का संकेत, बिशेष  सुरक्षा के बीच रहने की जरूरत है ।
श्री मोदी जी वर्तमान समय मे चंद्र महादशा के प्रभाव मे है जो ऊतम समय है सफलता मिलेगी जुलाई  2022  तक चंद्र सफलतापूर्वक देश का पार्टी का महिला सहयोगियो का बिशेष योगदान रहेगा ।। अक्टूबर  2019  से मई  2020 के मधय कुछ गलत सा फैसला लेने के कारण  गुप्त शत्रु भय सावधान ।।  ब्राह्मण बीरोधी फैसला लिया तो सर्वनाश  परिणाम देख चुके हैं एक झटकों मे पांच राज्य गवा चुके हैं और सवक लें। जुलाई  2022 के बाद मंगल महादशा मे   असली खेला हेवे  युद्धरत का समय  । सिमा का बिस्तार बरे भूभाग पर भारत का कब्जा होगा पर ऊसी दोरान मंगल महादशा मे  केतु के अंतर्दशा मे घात लगाकर जानलेवा हमला  भी होगा ।।   15  - 01 - 2027   से  12 - 06 - 2027  के मध्य ।
 बिस्तार भय से ईस लेख को यही बिराम देता हु  ।। पंडित पंकज मिश्र ज्योतिष कोलकाता कालीघाट ।
2029 तक मोदी जी कई ऐतिहासिक बरे फैसले लेगे, दुनियाभर मे मोदी का डंका बजेगा । भारत हि नही पुरे दुनियाभर  मे मोदी के बराबर कोई नेता नही रहेगा ।। pok भी भारत का हिस्सा होगा आने वाले समय मे भारत विश्व गुरु बनेगा ।।     ये बिश्लेशन बहुत ही संक्षिप्त विवरण दिया है ।।

#श्री_नरेंद्र_मोदी_जी_को  #जन्मदिन_की_हार्दिक #शुभकामना ।। #पंडित #पंकज_मिश्र_ज्योतिष #कोलकाता_कालीघाट ।।  मित्रों कुछ अधकचरे नकली  ज्योतिष गलत कॉमेंट करेंगे जिन्हें ज्योतिष का ज्ञान ही नहीं वो  सुनी सुनाई बात  का अनुसरण करते हैं । मै तथ्यों के आधार पर लिखा हू ।। ये नकली ज्योतिष ही ज्योतिष को  बदनाम करते है , कहीं देख लिया अपना दिमाग नहीं लगाते हैं ।  Only dead fish go with the flow. नकली ज्योतिष को पहचाने ।। कुण्डली वही सही जिससे जीवन के घटना क्रम मेल करें ।

बुधवार, 20 जुलाई 2022

कालसर्प योग शान्ति का अनुभव प्रयोग। पंडित पंकज मिश्र ज्योतिष कोलकाता।।

#कालसर्प_योग के शान्ति का सबसे अच्छा उपाय।।पंडित पंकज मिश्र ज्योतिष कोलकाता।। कालसर्प_ प्राणप्रतिष्ठा युक्त यंत्र पूजा करे पाठ करे श्राद्ध भक्ति के साथ।। पंकज मिश्र।
ॐ नवकुलाय विद्यमहे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्प: प्रचोदयात्
पीपल या बरगद के पेड़ को प्रतिदिन पानी दें ।
आप इसके लिए राहु एवं केतु की पूजा करें ।राहु एवं केतु के मंत्रों का जाप करें।
कालसर्प दोष निवारण मंत्र का जाप करें |

आप इसके लिए राहु एवं केतु की पूजा करें। राहु एवं केतु के मंत्रों का जाप करें।
राहु के मंत्र– ।।ऊँ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम:।।

केतु के मंत्र – ।। ऊँ स्त्रां स्त्रीं स्त्रों सः केतवे नमः।।

भगवान शिव की पूजा अर्चना करें। सरसों का दीपक जलाकर “ओम नमः शिवाय“ मंत्र का 21000 बार जप करें।
भगवान श्री कृष्ण का पूजन करें और प्रतिदिन “ओम नमो भगवते वासुदेवाय”  मंत्र का 108 बार जप करें।
महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें।
कालसर्प दोष निवारण मंत्र का जाप करें |
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। नान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

नमनाग  स्त्रोत्र का पाठ करें।

अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलं शन्खपालं ध्रूतराष्ट्रं च तक्षकं कालियं तथा एतानि नव नामानि नागानाम च महात्मनं सायमकाले पठेन्नीत्यं प्रातक्काले विशेषतः तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत इति श्री नवनागस्त्रोत्रं सम्पूर्णं ll

॥ नाग गायत्री मंत्र ॥

ll ॐ नव कुलाय विध्महे विषदन्ताय धी माहि तन्नो सर्प प्रचोदयात ll

लंबे समय से कुंडली में कालसर्प दोष के नाम से आमजन परेशान होता रहा है । 

ये किसी को पता ही नहीं हैं कि एक सामान्य टोटके से इस दोष से मुक्ति पाई जा सकती हैं। असल में जब कुंडली में राहु व केतु के बीच शेष सात ग्रह आ जााते हैं तब कुंडली में कालसर्प दोष बनता है।।
कालसर्प योग मुख्य 12 प्रकार के होते हैं और इसका प्रभाव भी 12 तरह का होता है जो जन्मकुंडली से पता चलता है की कौन सी तरह की है।
एेसे में अमावस तिथि को  वे लोग जिनको रोजगार नहीं मिल रहा हैं, वे जिनका व्यापार नहीं चलता हो, विवाह में समस्या हो या अन्य समस्या हो वे ये #टोटका करें। कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए अमावस के दिन किए गए विशेष उपाय व टोटके बड़ा लाभ देते हैं। इसके लिए अमावस की दोपहर को पीपल के वृक्ष पर जल, दुध व शक्कर मिलाकर कालसर्प दोष से मुक्ति व शांति की प्रार्थना के साथ श्री सर्प सूक्त का जप 21 बार करें। इसके पूर्व सर्प गायत्री का जप 108 बार करें। सर्प गायत्री के जप के बाद ही 21 बार श्री सर्प सूक्त का पाठ करें।

ये है सर्प गायत्री
ऊं नवकुलाय विद्यमहे, विषदंताय धीमहि तन्न: सर्प प्रचोदयात:।

ये है श्री सर्प सूक्त का पाठ

ब्रह्मलोकेषु ये सर्पा शेषनाग परोगमा: नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।
इन्द्रलोकेषु ये सर्पा: वासु‍कि प्रमुखाद्य: नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।
कद्रवेयश्च ये सर्पा मातृभक्ति परायणा। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।
इन्द्रलोकेषु ये सर्पा: तक्षका प्रमुखाद्य। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।
सत्यलोकेषु ये सर्पा वासुकिना च रक्षिता। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।
मलये चैव ये सर्पा: कर्कोटक प्रमुखाद्य। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।
पृथिव्यां चैव ये सर्पा: ये साकेत वासिता। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।
सर्वग्रामेषु ये सर्पा: वसंतिषु संच्छिता। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।
ग्रामे वा यदि वारण्ये ये सर्पप्रचरन्ति। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।
समुद्रतीरे ये सर्पाये सर्पा जंलवासिन: नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।
रसातलेषु ये सर्पा: अनन्तादि महाबला:।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।#पंडित #पंकज_मिश्र_ज्योतिष_कोलकाता_कालीघाट।। #पारद_शिवलिंग की पूजा करे घर में स्थापित कर प्राण प्रतिष्ठित किया गया।।

रविवार, 10 जुलाई 2022

नाड़ी दोष जन्मकुंडली मे ।।

नाड़ी दोष  #जन्मकुंडली मे ।।
#पंडित_पंकज_मिश्र_ज्योतिष_कोलकाता  ।।
नाड़ी दोष होने पर अक्सर भावी दम्पती का गुण मेलापक मान्य नहीं होता है, इसका मुख्य कारण यह है कि 36 गुणों में से नाड़ी के लिए सबसे अधिक आठ गुण निर्धारित हैं। मेलापक में नाड़ी के द्वारा भावी दम्पति की मानसिकता व मनोदशा का मूल्यांकन किया जाता है। नाड़ी दोष होने पर वर-वधू में पारस्परिक विकर्षण पैदा होता है और संतान पक्ष के लिए यह दोष हानिकारक हो सकता है। नाड़ी दोष का परिहार (काट) यदि वर कन्या की कुंडली में उपलब्ध हो तो ऎसे में विवाह करना शास्त्रसम्मत है।

क्या है नाड़ी और दोष ?
भारतीय ज्योतिष में नाड़ी का निर्धारण जन्म नक्षत्र से होता है। प्रत्येक नक्षत्र में चार चरण होते हैं। नौ नक्षत्रों की एक नाड़ी होती है। जन्म नक्षत्र के आधार पर नाडियों को तीन भागों में विभाजित किया गया है, जिन्हें आद्य (आदि), मध्य और अन्त्य नाड़ी के नाम से जाना जाता है। यदि किसी का जन्म पुष्य नक्षत्र में हुआ हो तो उसकी मध्य नाड़ी होगी। इसी प्रकार अन्य सभी 27 नक्षत्रों का नाडियों में विभाजन निम्न प्रकार किया गया है।

आद्य नाड़ी: अश्विनी, आर्द्रा, पुर्नवसु, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद।

मध्य नाड़ी: भरणी, मृगशिर, पुष्य, पूर्वाफाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, धनिष्ठा, उत्तराभाद्रपद।

अंत्य नाड़ी: कृतिका, रोहिणी, आश्लेषा, मघा, स्वाति, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण और रेवती।

ब्राह्मण राशि पर प्रभावी!
ज्योतिष शास्त्र में समस्त राशियों को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र वर्ण (जाति) में विभाजित किया गया है। मेष, सिंह, धनु क्षत्रिय वर्ण, वृष, कन्या, मकर वैश्य वर्ण, मिथुन, तुला, कुंभ शूद्र वर्ण और कर्क, वृश्चिक, मीन राशियां ब्राह्मण जाति की हैं। अत: स्पष्ट है कि किसी भी जाति में जन्मे वर वधु की जन्म राशि यदि कर्क, वृश्चिक, मीन (ब्राह्मण जाति की) है तो इन राशियों के जातकों को नाड़ी दोष अधिक प्रभावित करेगा।

#नाड़ी_दोष_निवारण

वर-कन्या दोनों की राशि एक ही हो लेकिन जन्म नक्षत्र भिन्न-भिन्न हो या दोनों का जन्म नक्षत्र एक ही हो और राशि भिन्न हो तो नाड़ी और गण दोष प्रभावशाली नहीं बनेगा। इसी प्रकार दोनों के जन्म नक्षत्र एक हो परन्तु नक्षत्र चरण भिन्न-भिन्न हो तोे नाड़ी दोष मान्य नहीं होगा, यह शास्त्रसम्मत है। वर-कन्या का एक ही जन्म नक्षत्र हो परंतु चरण भिन्न हो तो नाड़ी दोष नहीं लगेगा। जैसे- वर ईशांत (कृतिका-द्वितीय चरण), कन्या उर्मिला (कृतिका-तृतीय) दोनों की अन्त्य नाड़ी है।

परन्तु कृतिका नक्षत्र के चरण भिन्नता के कारण नाड़ी दोष नहीं लगेगा। इसी प्रकार पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के 3 चरण, 4 चरण इन दोनों में नक्षत्र एक ही है परंतु राशि भिन्नता क्रमश: कुंभ, मीन होने के कारण नाड़ी दोष नहीं बनेगा।

वर-कन्या का एक ही जन्म नक्षत्र हो परंतु राशि भिन्न हो तो भी नाड़ी दोष नहीं लगेगा। दोनों की राशि एक ही हो परंतु नक्षत्र भिन्न हो तो नाड़ी दोष नहीं लगता। ध्यान रखें कि कन्या की जन्म राशि, जन्म नक्षत्र और चरण वर की जन्म राशि, नक्षत्र व चरण से पहले नहीं होने चाहिए, अन्यथा नाड़ी दोष परिहार होते हुए भी विवाह शुभ नहीं होगा। #पंडित_पंकज_मिश्र 
 #ज्योतिष_कोलकाता  #Kolkata_best_Astrologer .
  

शनिवार, 9 जुलाई 2022

ओम नमो भगवते वाशुदेवाय संतान गोपाल मंत्र प्रयोग।।

ओम नमो भगवते वाशुदेवाय
संतान गोपाल मंत्र प्रयोग।।
जिन परिवारों में संतान सुख न हो कुंडली में बुध और गुरू संतान प्राप्ति में बाधक हों तब पति-पत्नी दोनों को तुलसी की माला से पवित्रता के साथ 'संतान गोपाल मंत्र' का नित्य 108 बार जप करना चाहिए :-
देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:।।
आज प्रायः कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जिनको डाक्टर, वैद्य आदि द्वारा इलाज करने पर भी संतान नहीं होती है। जहां मनुष्य के सभी भौतिक प्रयास विफल हो जाते हैं वहां आध्यात्मिक उपाय करने से सफलता प्राप्त होती हैं।
जिन लोगों को संतान होने में बाधाएं आ रही हों अथवा मनोवांछित संतान की इच्छा हो, उन्हें अपने घर में #संतान_गोपाल_यंत्र को स्थापित करके संतान गोपाल मंत्र की साधना करनी चाहिए।
संतान की कामना से सहायक रात्रियां 
मासिक स्राव के बाद 4, 6, 8, 10, 12, 14 एवं 16वीं रात्रि के गर्भाधान से पुत्र तथा 5, 7, 9, 11, 13 एवं 15वीं रात्रि के गर्भाधान से कन्या जन्म लेती है।
१- चौथी रात्रि के गर्भ से पैदा पुत्र अल्पायु और दरिद्र होता है।
२- पाँचवीं रात्रि के गर्भ से जन्मी कन्या भविष्य में सिर्फ लड़की पैदा करेगी।
३- छठवीं रात्रि के गर्भ से मध्यम आयु वाला पुत्र जन्म लेगा।
४- सातवीं रात्रि के गर्भ से पैदा होने वाली कन्या बांझ होगी।
५- आठवीं रात्रि के गर्भ से पैदा पुत्र ऐश्वर्यशाली होता है।
६- नौवीं रात्रि के गर्भ से ऐश्वर्यशालिनी पुत्री पैदा होती है।
७- दसवीं रात्रि के गर्भ से चतुर पुत्र का जन्म होता है।
८- ग्यारहवीं रात्रि के गर्भ से चरित्रहीन पुत्री पैदा होती है।
९- बारहवीं रात्रि के गर्भ से पुरुषोत्तम पुत्र जन्म लेता है।
१०- तेरहवीं रात्रि के गर्म से वर्णसंकर पुत्री जन्म लेती है।
११- चौदहवीं रात्रि के गर्भ से उत्तम पुत्र का जन्म होता है।
१२- पंद्रहवीं रात्रि के गर्भ से सौभाग्यवती पुत्री पैदा होती है।
१३- सोलहवीं रात्रि के गर्भ से सर्वगुण संपन्न, पुत्र पैदा होता है। #पंडित_पंकज_मिश्र_ज्योतिष_कोलकाता।

कौन सा रत्न धारण करे ?

कौन सा रत्न धारण करे ?
पंडित पंकज मिश्र ज्योतिष  कोलकाता।
लग्न कुंडली के अनुसार लग्न भाव , पंचम भाव और नवम भाव के रत्न पहने जा सकते हैं जो ग्रह शुभ भावों के स्वामी होकर पाप प्रभाव में हो, अस्त हो या श‍त्रु क्षेत्री हो उन्हें प्रबल बनाने के लिए भी उनके रत्न पहनना प्रभाव देता है।

 जो ग्रह शुभ होने के साथ कमजोर है उन्हें रत्न द्वारा बल दिया जाता है , और जो ग्रह कुंडली में अशुभ है जैसे 3, 6, 8, 12 भाव के स्वामी ग्रहों के रत्न नहीं पहनने चाहिए। इनको शांत रखने के लिए उपाय किया जाता है । 

रत्न पहनने के लिए दशा-महादशाओं का अध्ययन भी जरूरी है। केंद्र या त्रिकोण के स्वामी की ग्रह महादशा में उस ग्रह का रत्न पहनने से अधिक लाभ मिलता है। 

आप को रत्न के अनुसार उस ग्रह के लिए निहित वार वाले दिन शुभ घड़ी में रत्न पहना जाता है। पहनने से पहले रत्न को मंत्र जाप करके रत्न को सिद्ध करें, तत्पश्चात इष्ट देव का स्मरण कर रत्न को धूप-दीप दिया तो उसे प्रसन्न मन से धारण करें। 

रत्न सबके लिए नहीं होते। वे सुंदरता की वस्तु न होकर प्राणवान ऊर्जा के स्रोत के रूप में कार्य करते हैं। लेकिन उनका चयन अपने लिए अपने लग्न की राशि के अनुसार करना चाहिए, अन्यथा प्रतिकूल रत्न किसी भी सीमा तक प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। 

रत्न बड़े प्रभावशाली होते हैं। यदि लग्नेश व योगकारक ग्रहों के रत्नों को अनुकूल समय में उचित रीति से जाग्रत कर धारण किया जाए तो वांछित लाभ प्राप्त किया जा सकता है। रत्न विशेष की अंगूठी निर्धारित धातु में बनवाकर धारण करने से विशेष लाभ होता है। 
जन्मकुंडली का सटीक बिचार । कुंडली मिलान रत्न बिचार के लिए पंडित पंकज मिश्र ज्योतिष कोलकाता  ।।

बुधवार, 29 मार्च 2017

#yogi_aditya_nath #horescope #janmkundali. by #pandit_pankaj_Mishra_Astrologer_kolkata.

योगी आदित्यनाथ का जन्म 05 . 06 1972 को पौड़ी गढ़वाल उत्तराखंड में पंचूर ग्राम में राजपूत परिवार में हुआ। इनके पिता का नाम आनन्द सिंह बिष्ट जो की फॉरेस्ट रेंजर थे और माता का नाम साबित्री देवी है। सात भाई बहनों में इनसे बड़े तीन बहनो एक भाई के बाद इनका जन्म हुआ इनसे दो छोटे भाई है। इनके बचपन का नाम अजय सिंह बिष्ट था। 1977 में टिहरी  ग्राम स्कुल में सिच्छा सुरु की और 1987 में दशवी पास की। 1989 में इन्होंने ऋषिकेश भारत बिद्या मंदिर इंटरमीडिएट की परीछा पास की। 1990 में ये ग्रेजुएशन करते हुए अखिल भारतीय बिद्यार्थी परिसद से जुड़े। 1992 में इन्होंने गड़वाल बिस्वबिद्यालय से गणित में बीएससी की परीछा पास की। 1993 मे ये गोरखपुर आ गए और गोरखनाथ मंदिर के महंत से दिच्छा लेकर 1994 में पूर्ण सन्यासी बन गये. और अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्य नाथ बन गए। अब मैं इनके जन्मकुंडली के आधार पर इनके जीवन का बिश्लेशन करने का कोशिष करंगे। योगी आदित्य नाथ जी का जन्म कर्क  लग्न  और कुंभ राशि का  है । यद्यपि मिडिया मे इनकी  सिंह  लग्न  का  कुंडली  प्रचलित है  जो  इनके  जीवन  से  मेल  नही  खाती है । बहुत  अध्ययन करने पर  कर्क  लग्न  की  कुंडली  इनके  जीवन के हर क्षेत्र के  ग्रहो  का  पडाव  घटना  मेल खाता है ।
 कर्क  लग्न का  जातक  बहुत ही  भावुक  सेंटीमेंटल  ईमोशनल  होता है  । कुंभ  राशि  के  स्वामी  शनि  और  लग्न  मे केतु  सांसारिक  शुख  से  बैराज्ञ  विरक्त और   आध्यात्मिकता  के  तरफ  ले  आया । शनि का महादशा फरबरी 1983 से 2002 तक चला और शनि इनको पूर्ण सन्याशी बना दिया। शनि और राहु राजनीती का प्रवल कारक ग्रह है , शनि जनता का प्रतिनिधित्व करता है और राहु राजनीत का करक ग्रह है। 1998  मे शनि महादशा राहू अन्तरदशा में ये गोरखपुर से बीजेपी के टिकल से पहली बार महज 26 साल के उम्र में चुनाव जीत गये और सबसे युबा संसद बन गए। 25 -02 -2002 से बुध की महादशा सुरु हुइ , और अप्रैल 2002 में इन्होंने हिन्दू युबाबहिनी की स्थापना की। 1998  से अबतक ये लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं लगातार 5 वार। बुध महादशा सूर्य अंतर राहु प्रत्यंर में 2008 में आजमगढ़ में इनके ऊपर जानलेवा हमला हुआ पर बाल बाल बच गये। ये समय अपने आप को राजनीत में स्थापित करने का समय था कठिन संघर्ष करना परा। अब आगे देखिये अद्भुत संयोग जो ज्योतिष को नहीं मानते उनको भी मानना पड़ेगा , बुध महादशा शनि उन्तरदश बुध प्रत्यंतर में दिनांक 19 -03 -2017 रविवार को दोपहर 02 बजकर 18 मिनट जब कर्क लग्न था , योगी जी का कुंडली कर्क लग्न का है ,  उत्तरप्रदेश के 21 वे मुख्यमंत्री की सपथ ली , अब देखिये बुध लाभ स्थान में सत्ता कारक सूर्य के साथ बुद्धादित्य योग बना रहा है और बुध और सत्ता कारक ग्रह सूर्य भी   रोहिणी नछत्र में है और शनि भी रोहिणी नछत्र में है रोहिणी नछत्र का स्वामी चन्द्रमा योगी जी का लग्न का स्वामी है चन्द्र लग्न का स्वामी शनि राशि स्वामी और बुद्धादित्य योग सत्ता सुख। सत्ता तो मिल गया  लेकिन 25 -02 2019 के बाद सत्ता सम्हालना मुश्किल होगा मुख्यमंत्री का कुर्शी छीन सकता है , लग्न में केतु और द्वादश में मंगल गुप्त सत्रु द्वारा हमला , अपने सुरक्छा का बिशेष ध्यान रखना होगा। ये लेख बहुत संछिप्त में लिख रहा हु बिस्तार भय से इस लेख को यही बिराम देता हु। पंडित पंकज मिश्र कोलकाता। मिडया मे एक दुसरे  का  नकल  कर  सभी लोग एक साथ सिह लग्न  की  कुंडली  बिना  सोचे समझे  बता  रहे है जो  इनके जीवन  से मेल नही  खाता है । जोगी जी के चेहरे से साफ पता चलता है कर्क लग्न लग्न में केतू सन्याशी बना दिया केतु पशु प्रेमी बनाता है , संसद में जोगी जी बच्चो के तरह उलाहना देते हुए रोये थे ये कर्क लग्न और केतु के कारण , जीवन के सारे घटना क्रम दशा उन्तरदशा कर्क लग्न के कुंडली से पूरा मेल खाता है। पण्डित पंकज मिस्र कोलकाता।
yogi adityanath janmkundali by pandit pankaj mishra

शुक्रवार, 17 मार्च 2017

#KALSARP _DOSH.

काल सर्प योग निवारण के उपाय।
काल सर्प योग तब बनता है जब राहु और केतु के मध्य सारे ग्रह आ जाय और ग्रहो पर राहु और केतु का पूरा प्रभाव हो तो उसे काल सर्प योग कहते हैं। 
काल सर्प योग मुखयतः 12 प्रकार के होते हैं।( 1) अनन्त ( २ ) कुलिक ( 3) बासुकि ( 4 ) संखपाल ( 5) पद्म ( 6  ) महापद्म  ( 7 ) तछक (8 ) कर्कोटक (9 ) संखचूड़ (10 ) घातक (11 ) बिषधर (12 ) शेषनाग। परीक्छण से विद्वानों ने 288 प्रकार के कालसर्प योग बताये हैं। बिभिन्न तरह के कालसर्प योग का प्रभाव अलग अलग पड़ता है। बिभिन्न तरह के कालसर्प योग का प्रभाव का बरणन करू तो लेख बहुत लम्बा हो जायेगा। 
कालसर्प दोष के निबृति का उपाय ;- कालसर्प दोष से बचने के लिए कालसर्प दोष की पूजा करनी चाहिए। यह पूजा गंगा के किनारे ,शिव मंदिर में होना चाहिए , शिव का रुद्राभिषेक कराकर नागों को खोडशोपचार पूजा करानी चाहिये पूजा के बाद हवन बिधि भी जरुरी है। पूजा में 12 नाग की जरुरत होती है वह नाग चांदी,   सोना ,ताम्बे से बना हो। हवन करने के बाद इन्हें जल में प्रवाह करना चाहिए और ब्राह्मण को दान दछिणा करके , जातक को सहबस्त्र गंगा स्नान करना चाहिए , बस्त्र को गंगा घाट पर ही छोड़ देना चाहिये और नित्य कालसर्प मन्त्र का जाप करना चाहिए ये मन्त्र है ;- एक दन्ताय विद्महे बिष दन्ताय धी माहि तन्नो शर्पः प्रचोद्यात // पंडित पंकज मिस्र कोलकाता //


बुधवार, 15 मार्च 2017

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मोदी जी की जन्मकुंडली। मोदी जी का जन्म 17 सितंबर 1950 को मेहसाणा गुजरात में 12 . 09 बजे हुवा।
जन्म के समय बृश्चिक लग्न और बृश्चिक राशि था। लग्न और राशि का स्वामी मंगल है मंगल को नवग्रह में सेनापति माना गया है , मंगल द्र्ढ साहस देता है मंगल निर्भीक बनाता है ,और भरपूर ऊर्जा देता है करा निर्णय लेना मंगल का गुण है , मंगल जरुरत से ज्यादा जिद्दी साहसी और अपने बिचारो से पीछे नहीं हटने बाला , प्राण जय पर बचन न जाये ये मंगल का गुण है। मोदी जी की कुंडली में प्रतिनिधि ग्रह मंगल लग्न में स्वराशि बलबान है। कुंडली में मंगल के साथ चंद्र का युति , चन्द्रमा राजयोग कारक है ,चंद्र भाग्य स्थान का स्वामी लग्न में राजयोग तो बना रहा है ,पर चंद्रमा नीच का है ,चंद्रमामानशोजातः ,चन्द्रमा मन का करक ग्रह है जो मानषिक तनाव बिरोधियो द्वारा मिथ्या आरोप प्रपञ्च लगते रहेगें। लग्न राशि का स्वामी मंगल का लग्न में होना बैबाहिक सुख नहीं दिया। कर्म स्थान के स्वामी सूर्य  लाभ स्थान में उच्च के बुध के साथ बुद्धादित्य योग बना रहे है ,सूर्य राजकीय ग्रह है ये राज्यसत्तासुख देता है और बुध बाणी का करक ग्रह है ,बुध उच्च का होने के कारण नरेन्द्र भाई मोदी बहुत अच्छे बक्ता हैं इनके भाषणों में एक अलग प्रभाव होता है। किसी भी राजनेता को सत्ता सुख तभी मिलता है जब जनता सपोर्ट करे , ज्योतिष में जनता का बिचार चौथे भाव से किया जाता है। इस कुंडली में जनता स्थान का स्वामी शनि है और कर्म स्थान में बैठा है पर शनि अपने शत्रु राशि सूर्य के घर में है ,जनता का एक वर्ग मोदी का जल्दी भरोसा नहीं करेगा पर अंत में कोई रास्ता नहीं दिखने पर भरोसा करना पड़ेगा। गुरु शनि समसप्तक है ऐसा योग जातक को सन्याश के तरफ प्रेरित करता है , मोदी जी अपने प्रारंभिक जीवन में सन्याशी का भी जीवन बिता चुके हैं। बर्तमान में चंद्र की महादशा चल रही है जो राजयोग कारक है , 13 . 03 . 2018 से 12 . 10 . 2018 , तक समय ठीक नहीं है उस समय बिशेष स्वास्थ और सुरक्छा का ध्यान रखना पड़ेगा। वैसे भी लग्न में बलवान मंगल कभी भी घातक हमला करवा सकता है। 2027 तक मोदी का बिजय रथ आगे बढ़ता जायेगा। पंडित पंकज मिश्र कोलकाता। मित्रो बिस्तार भय से इस लेख को यही बिराम देता हु।

बुधवार, 1 मार्च 2017

सहीद की बेटी

बाप सहीद हुवा कोई नहीं जाना ,लेकिन बेटी देशद्रोहियो के बहकावे में आ गई रातो रात हीरोइन बना दी गई मिडिया द्वारा।  हमारे देश का मिडिया खास कर आजतक avp ndtv जैसे चैनल देश बिरोधी चैनल समाज में जहर घोलने के काम में लगे है इनका बिरोध होना चाहिए। 

सोमवार, 14 नवंबर 2016

NOT KA KHEL

नोट का भोट। हजार पाँच सो के नोट बंदी के बाद अब मोदी बिरोधी नया घिणौना खेल सुरु कर दिया है। मोदी बिरोधी नेता अपना कला धन अपने समर्थको को बाँट रहे है और नोट बदल कर लाने पर उनको कमीसन दे कर सारा काला धन को सफेद करने में लगे हैं। उनको ये नीर्देश दिया गया है की बैंको में जरुरत से ज्यादा भीड़ लगवाओ ,ताकि आम जनता बैंक के काउन्टर तक पहुँच ही न पाए , अब्यबस्था फैलाओ ,बैंक बाले काम ही नहीं कर पाये जनता परेशान हो जाये और मोदी के ईस फैसले का जनता वयापक स्तर पर बिरोध करे। इस तरह से ये नेता पचास दिनों में अपना सारा कला धन को अपने समर्थको को कुछ परसेंट कमिसन दे कर अपना सारा कला धन सफ़ेद कर लेंगे , आम जनता भूख से मोदी के बिरोध में सड़को पर उतर जाएगी। तब तक ये सारा धन सफ़ेद कर लेंगे। नोट भी इनका और भोट भी इनका। मोदी को इस घिणोनी चाल का काट निकालना परेगा। मैं खुद ये देख रहा हु , पिछले चार दिनों से जो बैंक में भीड़ भार था वो इलाके के आदमी थे। आज सुबह जब बैंक गया तो , सभी बैंको के सामने अचानक हजारो के संख्या में अनजान चेहरा गांव देहात से असमाजिक तत्व टाइप के चेहरे अव्यबस्था तोर फोर जैसा हरकत ताकि बैंक से आम जनता कोई काम न कर सके और लोग मोदी को गली दे। इस घटिया चाल का काट मोदी जी को निकालना पड़ेगा। बहुत सारे बांग्ला देसी मुस्लिम जो लेबर मजदुर का काम करते है , मजदूरी छोर कर बैंको में लाइन में मजदूरी से कई गुणा ज्यादा पैसा बना रहे हैं और आम जनता का सब्र का बांध टूट रहा है।